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Rajasthan Politics : ‘अपमान बर्दाश्त नहीं, खामियाज़ा भुगतेगी कांग्रेस’, अपनी ही पार्टी पर क्यों भड़के पूर्व मंत्री विश्वेन्द्र सिंह?
2026-08-24 05:08
Rajasthan Politics : ‘अपमान बर्दाश्त नहीं, खामियाज़ा भुगतेगी कांग्रेस’, अपनी ही पार्टी पर क्यों भड़के पूर्व मंत्री विश्वेन्द्र सिंह?
Rajasthan Deeg Congress Controversy : डीग कांग्रेस में निकाय चुनाव से पहले बड़ा असंतोष। सूची में नाम गायब होने पर पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने जिलाध्यक्ष राजीव सिंह पर बोला हमला।
Rajasthan Politics : ‘बेतहाशा बढ़ रहे चीनी के दाम, महंगाई से जनता बेहाल’, BJP पर हमलावर कांग्रेस नेता
2026-08-24 04:07
Rajasthan Politics : ‘बेतहाशा बढ़ रहे चीनी के दाम, महंगाई से जनता बेहाल’, BJP पर हमलावर कांग्रेस नेता
Politics on Sugar Price Rise : चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर राजस्थान कांग्रेस आक्रामक। प्रताप सिंह खाचरियावास और अशोक गहलोत ने इथेनॉल नीति पर बीजेपी सरकार को घेरा।
एक सरकारी नौकरी के पीछे हजारों युवा क्यों? भारत में Government Job की भूख की असली कहानी
2026-08-24 03:29
एक सरकारी नौकरी के पीछे हजारों युवा क्यों? भारत में Government Job की भूख की असली कहानी
लाखों युवा सरकारी नौकरी के लिए सालों तैयारी करते हैं, लेकिन सीटें सीमित हैं और परीक्षा विवाद लगातार बढ़ रहे हैं. आखिर ऐसा क्या है जो सरकारी नौकरी को आज भी युवाओं की पहली पसंद बनाए हुए है? The post एक सरकारी नौकरी के पीछे हजारों युवा क्यों? भारत में Government Job की भूख की असली कहानी appeared first on Prabhat Khabar .
सावन में नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में हुआ प्रसाद वितरण श्रद्धालुओं व राहगीरों ने ग्रहण किया पूड़ी-सब्जी का प्रसाद
2026-08-24 03:14
सावन में नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में हुआ प्रसाद वितरण श्रद्धालुओं व राहगीरों ने ग्रहण किया पूड़ी-सब्जी का प्रसाद
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मारा गया एक और पति: फरीदाबाद में पत्नी ने प्रेमी संग की युवक की हत्या, शव को घर के पड़ोस में प्लॉट में दफनाया
2026-08-24 00:11
मारा गया एक और पति: फरीदाबाद में पत्नी ने प्रेमी संग की युवक की हत्या, शव को घर के पड़ोस में प्लॉट में दफनाया
हरियाणा के फरीदाबाद जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
इमरान के दामाद सपा में गए,भतीजे ने घरेलू लड़ाई खोली:शायान बोले- मैदान में आएं; यूपी में काजी मसूद परिवार में बढ़ी वर्चस्व की जंग
2026-08-24 00:02
इमरान के दामाद सपा में गए,भतीजे ने घरेलू लड़ाई खोली:शायान बोले- मैदान में आएं; यूपी में काजी मसूद परिवार में बढ़ी वर्चस्व की जंग
सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के दामाद शायान ने कांग्रेस छोड़कर सपा जॉइन कर ली। इसके बाद पश्चिमी यूपी में काजी परिवार एक बार फिर चर्चा में है। करीब 50 साल से सहारनपुर की सियासत में प्रभाव रखने वाले इस परिवार की पहचान पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. काजी रशीद मसूद ने बनाई थी। उनके बाद उसी राजनीतिक विरासत पर परिवार के अलग-अलग चेहरे दावेदारी जता रहे हैं। लेकिन, तीसरी पीढ़ी की एंट्री ने सियासी समीकरण ही बदल दिए हैं। इसमें एक तरफ रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद हैं। दूसरी तरफ अपने दम पर मजबूत राजनीतिक पहचान बना चुके उनके भतीजे और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद। इमरान के जुड़वां भाई नोमान मसूद भी लंबे समय से अपनी सियासी जमीन तलाश रहे हैं। वहीं, शायान के सपा जॉइन करने के बाद पारिवारिक विवाद भी खुलकर सामने आ गया। 22 अगस्त (शनिवार) को इमरान के भतीजे हमजा नोमान मसूद फेसबुक पर लाइव आए। उन्होंने अपने बहनोई शायान मसूद पर बहन से मारपीट कर घर से निकालने का आरोप लगाया। कहा- परिवार करीब 5 साल से कई बातें चुपचाप सहन कर रहा था। लेकिन, बहन से ज्यादती के बाद अब चुप रहना संभव नहीं। इसके बाद काजी परिवार की यह लड़ाई वर्चस्व, विरासत और अगली पीढ़ी की राजनीतिक लॉन्चिंग की कहानी बनती दिखाई दे रही है। रशीद मसूद ने भतीजे इमरान को दी सियासी पहचान, फिर रास्ते अलग हुए काजी रशीद मसूद और इमरान मसूद का राजनीतिक रिश्ता कभी बेहद मजबूत था। इमरान ने अपनी शुरुआती राजनीति चाचा रशीद मसूद की छाया में ही आगे बढ़ाई। 2007 में मुजफ्फराबाद विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़कर सपा के तत्कालीन मंत्री जगदीश राणा को हराया। इसके बाद इमरान का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। 2012 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर नकुड़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और करीब 85 हजार वोट हासिल किए। लेकिन, चुनाव हार गए। यहीं से काजी परिवार के भीतर अगली बड़ी राजनीतिक लड़ाई की जमीन तैयार होने लगी। 2012 के बाद इमरान और काजी रशीद मसूद की राजनीतिक राहें अलग हो गईं। इमरान कांग्रेस में चले गए, जबकि रशीद मसूद दोबारा सपा के साथ हो गए। 2014 बना सियासी दूरी का साल 2014 का लोकसभा चुनाव काजी परिवार की राजनीति में निर्णायक मोड़ माना जाता है। सपा ने सहारनपुर लोकसभा सीट पर इमरान मसूद को टिकट देने का फैसला किया था, लेकिन इससे पहले वह पार्टी छोड़ चुके थे। इसके बाद सपा ने काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद को टिकट दे दिया। इमरान यह चुनाव ने कांग्रेस से लड़ा। एक ही परिवार के दो चेहरे अलग-अलग पार्टी से आमने-सामने हो गए। नतीजा भी इस पारिवारिक सियासी मुकाबले की तस्वीर बताने वाला रहा। इमरान दूसरे नंबर पर रहे, जबकि शाजान चौथे नंबर पर। इस चुनाव के बाद परिवार की राजनीतिक दूरी और गहरी हो गई। यहीं से सवाल उठा कि काजी रशीद मसूद की राजनीतिक विरासत का वास्तविक उत्तराधिकारी कौन होगा? उनका बेटा शाजान या वो भतीजा, जिसे उन्होंने खुद लंबे समय तक सियासी जमीन तैयार करके दी थी? रशीद मसूद के निधन के बाद बेटे शाजान के सामने नई चुनाती आई 5 अक्टूबर, 2020 को काजी रशीद मसूद के निधन के बाद परिवार की सियासी तस्वीर और बदल गई। रशीद मसूद के बेटे शाजान के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी अलग राजनीतिक जमीन तैयार करने की रही। यहीं से परिवार के भीतर एक नई राजनीतिक प्रतिस्पर्धा दिखाई देने लगी। दूसरी तरफ, इमरान मसूद अपनी राजनीति को लगातार विस्तार देते रहे। कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने सहारनपुर की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की। जिले की राजनीति में उनकी भूमिका इतनी प्रभावशाली मानी जाती रही कि कई विधानसभा सीटों के राजनीतिक समीकरणों में भी उनका प्रभाव चर्चा में रहा। इस तरह एक ही परिवार के 2 राजनीतिक केंद्र बन गए। एक तरफ रशीद मसूद के वारिस के तौर पर शाजान मसूद और दूसरी तरफ अपनी अलग राजनीतिक पहचान बना चुके इमरान मसूद। इमरान के जुड़वां भाई नोमान को हर बार हार मिली काजी परिवार की इस राजनीतिक कहानी में इमरान मसूद के जुड़वां भाई नोमान मसूद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नोमान ने भी चुनावी राजनीति में कई बार अपनी किस्मत आजमाई। 2017 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर गंगोह विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और दूसरे नंबर पर रहे। 2019 का उपचुनाव भी उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। बाद में 2022 में उन्होंने बसपा के टिकट पर भी इसी सीट से चुनाव लड़ा और हार गए। यानी परिवार की राजनीति में नोमान भी लगातार अपनी सियासी जमीन तलाशते रहे हैं। सियासत में काजी परिवार की तीसरी पीढ़ी की एंट्री काजी परिवार की सियासत में अब तीसरी पीढ़ी की एंट्री ने कहानी को और दिलचस्प बना दिया है। शाजान मसूद के बेटे शायान मसूद ने 20 अगस्त को कांग्रेस छोड़कर सपा का दामन थाम लिया। उन्हें सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पार्टी में शामिल कराया। शायान के सपा में जाने के बाद उन्होंने अपने ससुर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की राजनीति से असहमति जताई। शायान का कहना था कि अगर भाजपा के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़नी है, तो भाजपा के खिलाफ बोलना होगा। उनका आरोप था कि इमरान मसूद लगातार अखिलेश यादव के खिलाफ बोल रहे हैं। इससे भाजपा को फायदा पहुंचता है। इसी राजनीतिक मतभेद को उन्होंने इमरान से अलग होने की वजह बताई। राजनीतिक तौर पर देखें, तो शायान का सपा में जाना महज पार्टी बदलना नहीं है। यह काजी परिवार की तीसरी पीढ़ी की अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश है। भतीजा बोला- शायान ने बहन से ज्यादती की, मारपीट कर घर से निकाला रशीद मसूद की विरासत का उत्तराधिकारी कौन? काजी परिवार के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि काजी रशीद मसूद की विरासत को आगे कौन ले जाएगा? क्या वह इमरान मसूद होंगे, जिन्हें रशीद मसूद ने शुरुआती दौर में राजनीतिक जमीन दी थी? क्या बेटे शाजान मसूद अपने पिता की विरासत को फिर से मजबूत करने में सफल होंगे? क्या नोमान मसूद अपनी अलग राजनीतिक पहचान बना पाएंगे? या फिर शायान मसूद नई पीढ़ी का चेहरा बनकर परिवार की राजनीति को नई दिशा देंगे? ------------------------- ये खबर भी पढ़िए- सांसद इमरान मसूद की बेटी से मारपीट, घर से निकाला, सहारनपुर में भतीजा बोला- शायान ने बहन से ज्यादती की सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद के समाजवादी पार्टी जॉइन करने के बाद पारिवारिक विवाद खुलकर सामने आ गया है। शनिवार को इमरान के भतीजे हमजा नोमान मसूद ने फेसबुक लाइव किया। इसमें उन्होंने अपने बहनोई शायान मसूद और उनके पिता शादान मसूद पर बहन से मारपीट कर घर से निकालने का आरोप लगाया। पढ़ें पूरी खबर...
अखिलेश के मुखबिरों ने खोजा 26kg गोल्ड बिस्किट:चाबी के लिए तरसे मंत्रीजी; रसोइया की बातों को हवा में उड़ा गए अफसर-विधायक
2026-08-24 00:00
अखिलेश के मुखबिरों ने खोजा 26kg गोल्ड बिस्किट:चाबी के लिए तरसे मंत्रीजी; रसोइया की बातों को हवा में उड़ा गए अफसर-विधायक
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कानपुर: बगाही आंगनवाड़ी में बाल पुस्तकालय की स्थापना, बच्चों को बांटी गईं किताबें और रंग
2026-08-23 23:09
कानपुर: बगाही आंगनवाड़ी में बाल पुस्तकालय की स्थापना, बच्चों को बांटी गईं किताबें और रंग
इनर व्हील क्लब ऑफ कानपुर रॉयल ने बगाही स्थित आंगनवाड़ी में बाल ज्ञान ज्योति कार्यक्रम के तहत पुस्तकालय की स्थापना की।