छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं को अब ग्रास रूट से हाई-परफॉर्मेंस स्तर तक एक तय सिस्टम से तैयार करने की योजना है। सरकार ने इसके लिए करीब 100 करोड़ रुपए...
छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं को अब ग्रास रूट से हाई-परफॉर्मेंस स्तर तक एक तय सिस्टम से तैयार करने की योजना है। सरकार ने इसके लिए करीब 100 करोड़ रुपए के ‘खेल उत्कर्ष मिशन’ का रोडमैप बनाया है। इसके तहत 33 जिलों में 30 हजार से अधिक खिलाड़ियों के ओपन ट्रायल होंगे। चार चरणों की चयन प्रक्रिया के बाद 480 से 500 खिलाड़ियों को हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग दी जाएगी। मिशन में कोचों की संख्या 16 से बढ़ाकर 172 करने, सालाना 9,900 खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री खेल वृत्ति देने और 12 प्राथमिकता वाले जिलों में 24 डिस्ट्रिक्ट फीडर यूनिट शुरू करने का प्रस्ताव है। खिलाड़ियों की फिटनेस, रिकवरी, न्यूट्रिशन और प्रदर्शन के विश्लेषण के लिए राज्य का पहला एकीकृत स्पोर्ट्स साइंस सेंटर भी बनाया जाएगा। उनका पूरा रिकॉर्ड एथलीट मैनेजमेंट सिस्टम (एएमएस) पर दर्ज होगा। यानी कोचिंग, प्रतियोगिता, विज्ञान, डेटा और आर्थिक सहायता को एक सिस्टम से जोड़ा जाएगा। ‘डिजिटल कुंडली’ एएमएस में खिलाड़ी का रजिस्ट्रेशन, प्रदर्शन, नतीजे, ट्रेनिंग, उपस्थिति, कोच और खेलवृत्ति का रिकॉर्ड दर्ज होगा। इससे फीडर सेंटर से एक्सीलेंस सेंटर तक उसकी प्रगति लगातार ट्रैक की जा सकेगी। चयन, प्रशिक्षण और सहायता से जुड़े फैसले भी एकीकृत डेटा के आधार पर लिए जा सकेंगे। आउटसोर्स होंगे कोच, स्थानीय को मौका खेल विभाग में अभी सात वरिष्ठ प्रशिक्षक और नौ संविदा कोच हैं। मिशन के तहत नए कोच विभागीय भर्ती के बजाय आउटसोर्सिंग से रखे जाएंगे। जानकारों के मुताबिक, बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्य के खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर कोच बनने का अवसर दिया जा सकता है। संबंधित खेलों के योग्य कोच प्रदेश में नहीं मिलने पर दूसरे राज्यों से नियुक्ति की जाएगी। नोट: मिशन की अनुमानित लागत करीब 100 करोड़ रुपए बताई गई है, जबकि उपलब्ध मदों का योग 90 करोड़ रुपए है। रिकवरी तक वैज्ञानिक नजर प्रस्तावित स्पोर्ट्स साइंस सेंटर में स्पोर्ट्स मेडिसिन, फिजियोथेरेपी, बायोमैकेनिक्स, मोशन एनालिसिस, न्यूट्रिशन और स्पोर्ट्स साइकोलॉजी की सुविधाएं मिलेंगी। प्रत्येक की परफॉर्मेंस प्रोफाइल के आधार पर तकनीक, फिटनेस और ट्रेनिंग की जरूरतों का विश्लेषण होगा। चोट लगने पर रिहैबिलिटेशन जैसी रिकवरी सुविधाएं भी मिलेंगी। जिलों को खेलों के आधार पर पहचान बिलासपुर में तैराकी और तीरंदाजी, जशपुर में हॉकी और बैडमिंटन, दुर्ग में बॉक्सिंग और जूडो, सरगुजा में फुटबॉल और कबड्डी, राजनांदगांव में हॉकी और वॉलीबॉल तथा नारायणपुर में एथलेटिक्स और फुटबॉल पर विशेष फोकस रहेगा। 30 हजार से 500 तक... ऐसे होगा चयन स्टेज-1 जिला ओपन ट्रायल 33 जिलों में 30 हजार से अधिक खिलाड़ी शामिल होंगे। स्टेज-2 जोनल चैंपियनशिप बेहतर प्रदर्शन करने वाले करीब 5,000 खिलाड़ी अगले चरण में पहुंचेंगे। स्टेज-3 सीएम ट्रॉफी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में करीब 1,000 श्रेष्ठ खिलाड़ी उतरेंगे। स्टेज-4 हाई-परफॉर्मेंस पाथवे करीब 500 खिलाड़ियों का एकडमी व हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग के लिए चयन होगा।
इस घटना के विषय में स्थानीय सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। संबंधित विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक उद्देश्य शांति बनाए रखना और प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता प्रदान करना है।
इसके साथ ही, विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के दीर्घकालिक सामाजिक और राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं और प्रशासन से शीघ्र और पारदर्शी कार्यवाही की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस खबर को लेकर काफी चर्चा हो रही है।
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